मेरी क़लम - Meri Qalam - میری قلم ...

Tuesday, January 7, 2014

ईन और बीन का डिस्कशन

हेल्लो ! ईन...!
हां बीन, कैसा है ?
ईन : मैं मस्त, तू बता ...?
बीन : ठीक ही हूँ यार !
ईन : यार बीन तेरी "फेसबुक" देख रहा था, बहुत अच्छा लिख रहा है आज कल, तेरे जैसे कुछ और युवा लिखने लगे तो इन्किलाब आ जायेगा?
बीन : हम्म्म्म, शुक्रिया यार !
ईन : अच्छा सुन, कल सन्डे है तो थोडा सामाजिक कार्य करना है, तू तो करता ही होगा ना, आजकल तेरी फेसबुक इन्ही सब बातों से भरी रहती है ! हम कल एक अनाथ आश्रम जायेंगे, फिर एक सामाजिक कांफ्रेंस में और वहां से सीधे अस्पताल, मोहल्ले के 2 गरीब बच्चे एडमिट हैं... ठीक है ?
बीन : (अरे कहाँ फंस गया...) वो यार, क्या है ना की, कल मुझे काम है, मैं नहीं आ सकता... फिर कभी ! अच्छा मैं फ़ोन रखता हूँ !

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