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Saturday, January 11, 2014

हुकुकुल इबाद (बन्दों के हक़) अदा करने के परिणाम


मेरे एक बहुत ही घनिष्ठ मित्र है नज्मुस साक़िब , कुछ दिनों पहले उनसे इनफॉर्मल डिस्कशन चल रहा था, बातों ही बातों में उन्होंने कहा की अगर हमारे नौजवानों के भीतर सही मायने में हुकुकुल इबाद (बन्दों के हक़) अदा करने का जज़्बा पैदा हो जाए तो ऑटोमेटिकली समाज तेज़ी के साथ तरक्की करेगा... और एक दिन ऐसा आएगा की चारों तरफ शान्ति और समृधि होगी... अन्याय दम तोड़ देगा, बेईमानी का खात्मा हो जायेगा, कोई भूखा नहीं सोयेगा और ना ही कोई किसी के आगे हाथ फेलायेगा !
लोगों की हुकूमत खत्म हो कर सिर्फ और सिर्फ एक ईश्वर (अल्लाह) की हुकुमत होगी !

मैंने मन ही मन कहा, ऐसा ज़रूर होगा इंशा अल्लाह !

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