मेरी क़लम - Meri Qalam - میری قلم ...

Wednesday, January 1, 2014

प्रशंसा के लायक़ तो सिर्फ अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ही है


खैलदार अंजुमन के इस एतिहासिक क़दम की हर तरफ़ प्रशंसा हो रही है, साथ ही मुबारकबाद के कई मेसेज और इमेल्स भी प्राप्त हो रहे हैं !
प्रशंसा के लायक़ तो सिर्फ अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ही है, उसने खैलदार अंजुमन को इस काम के लिए चुना ! अल्लाह से दुआ है की वो हमारी मेहनतों को कुबूल फरमाए और हम जिस ख़ालिस मक़सद के लिए ये सब कर रहे हैं उसको हासिल करने में हमारी मदद फरमाए !

मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर,
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया !

इस ऑनलाइन प्रतियोगिता की कामयाबी में जिन दोस्तों और बुजुर्गों ने किसी भी तरह का सपोर्ट किया है, चाहे वो वक़्त देने का हो या दुआ का, आप तमाम के हम शुक्रगुज़ार हैं !

बहुत ही अज़ीज़ भाई नज्मुस साक़िब की अटूट मेहनत और लगन क़ाबिल ए तारीफ़ है ! आपके इस ख़िदमत ए खलक के जज़्बे को सलाम!
"हौसले हों बुलंद तो मंजिल दूर नहीं है", यह आपने साबित किया है !

अल बयान फाउंडेशन ट्रस्ट और अल फ़लाह सोसाइटी की मदद सराहनीय है !

भाई मुत्तलिब मिर्ज़ा, आदिल खान, साजिद खान (झुंझुनू), सैफुल इस्लाम, शादाब नोरेज़, वाशिद खान, शेहबाज़ शाकिर खान (जयपुर), आमिर आरिफ खान (जयपुर), राफिया खान (टोंक) वगेरह के कोंट्रीब्युशन के बिना हम इतना बड़ा काम अंजाम नहीं दे सकते थे... आप सभी को इंकलाबी सलाम!

कापियों को जांचने में मदद करने के लिए जनाब मोईनुद्दीन आज़मी साहब (रिटायर्ड सुपरवाइजर, अंजुमन खैरुल इस्लाम - बॉयज, मुंबई), इंजिनियर शुजाउद्दीन शकील सिद्दीक़ी (बिजनेसमैन, सोशल एक्टिविस्ट, हिंदी लेखक),
और इंजिनियर मुस्तेजाब खान (टेक्निकल आर्किटेक्ट, आई बी एम, मुंबई - हिंदी युवा ब्लॉगर, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट) का शुक्रिया !

"इक दिये से हज़ार चिराग जला दे, ये हौसला रखते हैं...."

जनाब डॉक्टर मुहम्मद नईम फलाही साहब (असिस्टंट प्रोफेसर), अबरार अहमद साहब (आर.ए.एस), शाकिर मिर्ज़ा साहब, मिर्ज़ा अब्दुल गफ्फार साहब, फ़रीद खान ठेकेदार साहब, मज़हर इमाम साहब, जमील अहमद साहब, अख्तियार अहमद साहब का पहले ही दिन से सपोर्ट मिला इन तमाम के हम शुक्रगुज़ार हैं !

"इंशाअल्लाह हम दुनियां पर छा जायेंगे रहमत बनकर.... !"

अल्लाह हमारा हामी ओ नासिर हो ! आमीन

- ज़ियाउल इस्लाम

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