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Thursday, October 3, 2013

शेरों की फांसी पर गधे का जश्न: क़िस्त 4


खैर से एक दिन खबर आई की पड़ोस के जंगल में चार शेरो को 35 साल पहले दो जंगलों के बीच में हुई लड़ाई में जंगल्द्रोह के अपराध में फांसी की सजा सुना दी गई है, सात आठ शेरों को उम्र कैद हुई, इस खबर से तो मानो गधे की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, उसने इस ख़ुशी में एक पार्टी दे डाली, लेकिन समस्या ये थी की इस गधे की दोस्तों में कई ऐसे थे जो फांसी की सजा को जंगलियत के खिलाफ मानते थे, कई सारे जानवरों को ये सब देख कर बड़ा अजीब लग रहा था की गधे और इसके दोस्तों को किया हो गया है, फिर गधे ने एक बढ़िया पटाखेदार लेख लिखा और बताया की दरअसल ये शेर मामूली नहीं बल्कि दुसरे देशों में इनका मजबूत नेटवर्क था और इनका अजेंडा कुछ और नहीं बल्कि एक रुढ़िवादी जंगल राज कायम करना था, और इनके नेटवर्क में बड़े बड़े लेखक और चिन्तक थे, लेकिन समस्या ये थी की दुसरे कई जंगलों में इस सजा को लेकर बड़ा विरोध हो रहा था, कई जन्गालाधिकार संगठन बड़ी बड़ी रिपोर्ट लिख रहे थे की जिनको शेर कहा जा रहा है वो शेर है ही नहीं और उन्हें ज़बरदस्ती शेर बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है, इन सबसे प्रभावित होकर कुछ बंदरों और कुत्तो और दो कौड़ी के जानवरों ने बैठक की और कहा की कहीं ऐसा तो नहीं की जिनको शेर बता कर मरवाया जा रहा है वो अपने ही भाई बंधू हों, अब समस्या ये थी गधों ने हमेशा से ही बंदरों और कुत्तों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी थी, जब कभी भी किसी कुत्ते और बन्दर को शेरों ने सताया या फर्जी तौर पर मारने का प्रयत्न किया तो गधों ने उनका साथ दिया, और यही वजह थी पिछले दस सालों में कई सारे शेर जंगल छोड़ के भाग गए, कई पुजारी बन गे कई, जेल चले गए और जो पार्टी शेरोन ने बनाई थी उसने भी कह दिया की अब वो खून नहीं पियेंगे, उन्होंने भेड़ धर्म अपना लिया है, ये सब जंगल में सबके विकास की बात कर रहे थे, इसकी वजह से लोमड़ियों की पार्टी को बहुत नुक्सान हो रहा था, उधर जंगल जनता पार्टी ने एक धुरंधर व्यक्ति को अपना नेता चुन लिया, हालांकि बहुत से लोगों को पता था की ये पहले खतरनाक शेर था और सैंकड़ों बंदरों और कुत्तों को मरवा दिया था लेकिन अब कुछ ऐसा सामान बांध गया था की कुत्ते और बन्दर खुद उसको हार पहना रहे थे, इन सब से लोमड़ियों में बहुत चिंता बढ़ रही थी, कुत्तों और बंदरों ने देखा की उनके जंगल में पुराने शेरों पर ये गधा चुप थे, उसके लेखों को चेक किया गया पता चला उसके लेखों में एक भी लेख दस साल पहले शेरोन द्वारा कुत्तों, गधों और बंदरों की हत्याओं पर कोई बात नहीं लिखी जा रही है, बल्कि ये लिखा जा रहा है की दुसरे जंगल में मारे जारहे कथित शेर और इस जंगल के शेर एक ही नस्ल के हैं तो जंगल के दुसरे गधों बंदरों और कुत्तों में चिंता दौड़ी, उन्होंने जंगल अधिकार संगठनों की रिपोर्टों को बगौर पढना शुरू किया, की कैसे कुत्तों और गधों को जबरदस्ती शेर घोषित करके उल्लू सीधा किया जा रहा है, तो गधों और कुत्तों ने एक जबरदस्त लेख लिख कर अभियान चला दिया की जिनको शेर बता कर फांसी देने की वकालत की जारही है वो शेर है ही नहीं, इसलिए कथित शेरों को असली शेरों को एक तराजू तौल कर रखना गलत है !
सबने ये समझा की गधा इस लेख को पढ़ कर उनका समर्थन करेगा और असली शेरोन के खिलाफ कुछ बोलेगा लेकिन हुआ उसके उल्टा, गधे ने जंगल के कुत्तों और बंदरों की बहुत बेइज्जती की, उनकों बहुत गाली दी, की तुम लोग दो कौड़ी के जानवर हो, कुत्ते हो, ये सब देख कर पुराने शेर बहुत खुश दिखे और संब गधे के समर्थन में लामबंद हो गए, अब गधा दुनिया भर में ये कहने लगा की कुत्ते तो हमेशा से ही शेरोन के समर्थक रहे हैं, और कुत्तों को भी निकाल भगाया जाय, गधे ने जंगल में हमदर्दी हासिल करने के लिए अपनी आत्म कथा लिखनी शुरू करदी, और बताने लगा की कैसे वो गाँव में रहता था लोमड़ी, सियार, भेडिये सब लोगों से उसके पारिवारिक सम्बन्ध थे, कैसे तेयोहारों में आन जाना था, इस आत्म कथा की वाह वाही शुरू हो गई, भेस बदल चुके शेर भी बहुत खुश थे की कुत्तों और बंदरों की शामत आ गई है !

गधों में बगावत और लोमड़ियों की चालाकी पर अगली क़िस्त देखें... !

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