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Tuesday, October 1, 2013

आतंकी शेर पर गधे की जीत का किस्सा: क़िस्त 3


गधे और शेर की लड़ाई से प्रभावित पास पडोस के लोग और सहयोगियों ने गधे को अमन एकता और शांति के कार्यक्रमों में बुलाना शुरू कर दिया जहाँ गधा शान्ति के बारे प्रवचन देता और शेर की बुराई करता, उसके जंगली तौर तरीकों के बारे में लोगों को होशियार करता लकिन ख़ास बात ये थी की शेर से लड़ा कैसे जाए तो ये किसी को नहीं मालूम था कियोंकि शेर को हारने वाला सिर्फ यही एक गधा था इसलिए इस गधे ने ये बताना शुरू किया की गधे से कैसे लड़ा जाय, पहले तो उसने ये बताया की जब दुनिया में शेर नहीं था तब बहुत अमन चैन था, उसने बताया की उसके मोहल्ले में शेर कभी नहीं था इसलिए गधे लोमड़ी सियार और हाथी सब बहुत मेलजोल से रहते थे एक दुसरे के सुख दुःख में जाते थे, फिर उसने ये समझाया की देखो जहाँ कहीं शेर मिले उसे दौड़ा कर मारो, भगाओ, उसे यहाँ रहने ही मत दो, गधे के प्रवचन में बैठे काफी सारे लोग ने गधे की जिंदाबाद के नारे लगाए और कहा की अगर आप जैसे गधे सारे गाँव में हो जाएँ तो हर जगह अमन चैन शान्ति हो जाए !
लेकिन कई एक के दिमाग में कीड़ा कुलबुलाने लगा, सबसे पहले ऊन्हे लगा की जंगल के इतिहास में शेर कब से है, ये तो हमेशा से ही है, तो फिर शेर तो जंगल का ही जानवर है, और बुजुर्गों से यही सुना है की शेर और गधे की लड़ाई कभी हो ही नहीं सकती कियोंकि शेर बहुत ताकतवर तो है ही साथ में उसे गधे का मांस बिलकुल ही पसंद नहीं है इसलिए गधे और शेर में दुश्मनी नहीं रहती, इसलिए लोगों ने सोचा कियों ना गधे के मोहल्ले में जाकर देखा जाय की सचमुच गधे ने शेर को हराया था या नहीं और मोहल्ले वालों से भी पुछा जाय, लेकिन जब वो उसके मोहल्ले गए तो गधे ने मोहल्ले वालों को सावधान कर दिया था और तमाम दरवाज़े बंद कर दिये की कोई संदिग्ध जानवर न घुसने पाए, सारे रास्ते ब्लोक कर दिए गए, लेकिन जहाँ चाह वहां राह, कुछ लोग गधा भक्त बन कर जय गधा जय गधा करते हुए गधे के मोहल्ले में जा पहुंचे, जाने के बाद कई चींजें ऐसी पता चली की सब अचम्भे में रह गए !
नंबर एक बात ये पता चली की गधे के सारे दोस्त वो हैं जो कभी न कभी शेर की मंडली में रह चुके थे, बल्कि ज़्यादातर शेर के दलाल रह चुके थे
दूसरी बात ये मालूम हुई की गधे का मीडिया और जनसंपर्क बहुत तगड़ा है, कई बूढी लोमड़ियों ने राज़ की शर्त पर बताया की ये गधा तो देश विदेश दौरे करता है जहाँ से उसे मोटी रकम मिलती है, और कई सारे अखबारों के संपादक और पत्रकारों को उसने अपने इर्द गिर्द जमा कर रखा है !
तीसरे ख़ास बात ये है की वो कभी दुश्मन के इलाके में जाता ही नहीं, वो तो खुद अपने दुश्मनों को कुत्ता और दो कौड़ी का जानवर कह कर समबोधित करता है और कहता है की वो किसी विरोधी को अपने मुंह लगाना अपनी शान के खिलाफ समझता है, तभी लोमड़ी ने कहा की ये शेर को हराने वाली बात पे हम सबको बहुत शक है, लेकिन किया करिए दारु दवा हमारी एक ही जगह से बंधी है वरना हम तो कबका बगावत कर दिये होते,
गधे की लेखनीय पटाखेदार थी, कई सारे शेर जो अब गधे के भक्त बन गए थे उसकी तारीफ करते नहीं थकते थे, कई शेरों ने बताया की वो कैसे तमाम जानवरों की सुरक्षा करते थे, कैसे उनके और दुसरे जानवरों के बीच में मधुर सम्बन्ध !!

चौथी क़िस्त जल्दी ही.... !!

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