मेरी क़लम - Meri Qalam - میری قلم ...

Wednesday, March 6, 2013

तुम कहाँ चले गए हमें छोड़ कर ?


कल एक ऐसा हादसा हुवा जिससे मन बहुत विचलित सा महसूस कर रहा है, मौत का एहसास दिल और दिमाग में ताज़ा सा हो गया ! कई दुआएं लबों पर जारी हो गयी !

मेरी शरीक़ ए हयात (निशात) के मामू के घर नन्हा मुन्ना सा एक मेहमान (बेटा) आया, और बेशक हम सब इस दुनियां में मेहमान की ही हैसियत तो रखते हैं ! उसके आने से घर और परिवार में हर तरफ ख़ुशी का माहोल था, और माहोल खुश भी क्यूँ ना हो ? वो मासूम सा बच्चा बहुत ही प्यारी सूरत का था, उसकी मुस्कान बहुत ही निराली थी, हर कोई उसे अपनी गोद में लेना चाहता था, उससे प्यार करना चाहता था !
 
मगर कुछ ही दिनों में उस मासूम को जैसे किसी की नज़र लग गयी थी, वो बीमार रहने लगा ! वजीरपुर से गंगापुर सिटी फिर जयपुर के अस्पतालों में उसका इलाज करवाया गया, माँ बाप ने कई कई रात और दिन कुर्बान कर दिए, उनके लबों पर सिर्फ यही १ दुआ होती थी की अल्लाह उनके इस मासूम से लाडले को सेहतमंद कर दे !
 
कुछ और दिन गुज़रे, उसे थोड़ी शिफा मिलने लगी ! मगर फिर से बीमारी का सिलसिला शुरू हो गया ! और फिर से वही अस्पताल, दवाइयां, जांचे, डॉक्टरो के चक्कर !!
 
लगभग २ महीनें इसी में गुज़र गए....
 
और कल ऐसा वक़्त आया की उसने मुस्कुराना छोड़ दिया, हलचल भी बंद कर दी, साँसे भी रोक दीं, और अपने रब से जा मिला ... यूँ ही सब को बेबस और बेसहारा छोड़ कर ... ! इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलय्ही राजीऊन !!
 
बेशक अल्लाह के तमाम फैसलों में खैर होता है ... !
 
वो अल्लाह का एक बहुत ही बेहतरीन तोहफा था, और उसकी अमानत भी जो उसने २ महीनो के लिए हमें अता की थी !
 
अल्लाह उस मासूम के माँ बाप और परिवार वालों को सब्र ए जमील अत फरमाए और उस बच्चे को इनके जन्नत में जाने का ज़रिया बनाए!
 
तुम कहाँ चले गए हमें छोड़ कर... अब मुलाक़ात होगी जन्नत में !! इंशाअल्लाह


No comments:

Post a Comment