मेरी क़लम - Meri Qalam - میری قلم ...

Wednesday, August 11, 2010

क्या कहेंगे इसे ??



एक विधार्थी है अयाज़ , उसने कुछ दिन पहले मुझे एक गरीब विधार्थी से मिलवाया था ! मालूम हुवा की वह गरीब तो था मगर पढने में बहुत ही होशियार ! उसने दसवीं कक्षा फर्स्ट डिविज़न से उत्तीर्ण की थी, और आगे भी पढने की बहुत इच्छा थी ! मगर मजबूरी थी पैसा !
मैंने और मेरे बहुत ही अज़ीज़ दोस्त ने उनसे कहा की कॉलेज का फार्म भरो और बाकी हम देख लेंगे !
कल रात को अयाज़ का फोन आया, उसने कहा की एडमिशन लिस्ट में उस विधार्थी का नाम आ गया है, और फीस जमा करवानी है, मैंने उससे कहा इंशा अल्लाह इंतेज़ाम हो जाएगा !
आज सुबह जब मैं ऑफिस पहुंचा तो मेरे मोबाईल पर अयाज़ का फ़ोन आया ! उसने कहा की आज ही फीस जमा कराने की आखरी तारीख है ! और १ बजे तक फीस के पेसे कालेज में जमा कराने हैं !
मैंने कहा आपको कल यह बताना चाहिए था की आज आखरी तारिख है , तो कल ही इंतेज़ाम कर लेते, फिर भी मैं कोशिश करता हूँ , क्यूंकि इतने जल्दी किसी से फीस स्पोंसर करने के लिए बातचीत करना थोडा मुशकिल था !
मैंने अपने दोस्त से बात की, वोह भी घर पर नहीं थे , लेकिन उन्होंने कहा की वो एक दो लोगों से बात करके बताएँगे !
थोड़ी देर बाद उन्होंने अयाज़ को फोन करके कहा की १ घंटे में फीस के आधे पेसे उनके एक दोस्त से ले लें ! और बाक़ी के अभी आप जमा करा दें , शाम को पूरे पेसे मिल जायेंगे !
कुछ समय के बाद मेरे मोबाइल पर अयाज़ का मेसेज आया, उसने लिखा था की " शुक्रिया ज़िया भाई, हमने पेसे का इन्तिज़ाम कर लिया है , मगर एक बात - कभी भी किसी गरीब को उम्मीद मित दिलाना "!
मैं अचंभित था !!! यही मेसेज मेरे दोस्त को भी गया !!! बाद में एक और मेसेज आया , जिसमें लिखा था की "अब हम कभी उससे बात करने की कोशिश ना करें.... वगेरह"!
कुछ समझ में नहीं आ रहा क्या कहेंगे इसे ???

2 comments:

  1. Ziya bhai,

    dusre ke dil ki bat ham nahi samja sakte, woh apni majburi ko sirf dekh raha tha.

    Ham jo kuch bhi karte hai Allah Ko khush karne ke liye karte. Uske sms se hami mayush nahi chihiye. Dukh hiti lekin lekin Allah ke waste bhulna padega.

    Allah Hafiz

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  2. Anjum Bhai,

    JazakAllah Khair...

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