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Saturday, July 17, 2010

मुंब्रा के निवासी वाक़ई शांति पसंद हैं


मुंब्रा, एक बहुत ही शांतिपूर्ण शहर है क्यूँकि यहाँ के निवासी बेहद शांति पसंद हैं!
पर कल रात अजीब द्रश्य था! मुंब्रा निवासी अपने घरों से बाहर आ चुके थे !  सड़क पर केवल लोगों का ही सैलाब नज़र आ रहा था ! यह द्रश्य था मुंब्रा
आमदार  (MLA ) श्री जीतेन्द्र आव्हाड  के जनसंपर्क कार्यालय के बाहर का !
हुवा यूँ की मुंब्रा में जो लोड शेडिंग प्रात:कालबजे से 10  बजे तक और दोपहर 2 :30 से सांय 6 :30 तक (मात्र 8 घंटे) हुवा करती थी, और साथ ही साथ आपातकालीन लोड शेडिंग एवं बीच में आँख मिचोली भी (2 मिनट आना और आधा या एक घंटा जाना ), वह रिकॉर्ड तोड़ कर अनिश्चित घंटो में परिवर्तित हो गयी थी ! (ज्ञात रहे निकटवर्ती कलवा, दिवा इत्यादी में यही लोड शेडिंग मात्र 3 घंटे है)
अतः पूरा दिन लाईट बंद रही!
जहाँ भी सुनाई दिया वह बच्चे बिलक रहे थे , विद्यार्थी प्रातः 6 बजे से ही इंतज़ार में थे , व्यवसाई, जिनका व्यवसाय ही लाईट पर निर्भर है, हाथ पर हाथ धरे हुवे बैठे थे !
इंतज़ार करते करते सायं के 7 बज गए पर फिर भी अँधेरा !
आखिरकार लोग घरों से बाहर आये और महामहिम MLA साहेब के ऑफिस के बाहर इकठ्ठा होने लगे! जैसे जैसे लोगों की तादाद में बढ़ोतरी हो रही थी वैसे वैसे ही पुलिसकर्मी भी बढ़ रहे थे ! देखते ही देखते तादाद सेकड़ों में पहुँच गयी !
लोग मोमबत्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, रोड जाम हो चूका था , नारों की आवाज़े मुंब्रा को हिला रही थी !
अचानक लोग काबू से बाहर हो गए, नारों का शोर ऊँचा हो गया, जब पलट कर देखा तो मुंब्रा के बड़े ही  अरमानों और वादों के साथ चुने गए MLA और उनके बोडिगार्ड उन्हें भीड़ से बचाते हुवे ऑफिस में प्रवेश करा रहे थे!
फिर क्या था तडपी हुई जनता ने हाहाकार मचा दिया! चारों तरफ से यही आवाज़े रही थी : क्या हुवा, तेरा 100 दिनों का वादा (याद रहे MLA बनने से पूर्व आव्हाड साहेब ने जनता से यही वादा किया था की यदि उन्हें जीता दिया तो वह 100 दिनों में लाईट की समस्या दूर कर देंगे) !! MSEB  चोर है !! MLA भी चोर है !!
अचानक MLA साहेब कुर्सी पर चढ़ गए और जनता से हाथ जोड़कर खामोश होने को कहा, पर इसके विपरीत जनता अपनी पूरी ताक़त के साथ नारे लगा रही थी ! कुछ समय पश्चात् शोर थोडा कम हुवा , और MLA साहेब ने बोलना शुरू किया की : "मैं जब से MLA बना हूँ यही कोशिश कर रहा हूँ की आपकी समस्या दूर करूं, सुबह से मैं भी MSEB वालो से लड़ रहा हूँ आदि..." और फिर एक पेपर में कुछ दिखाने लगे ! जनता फिर से कहना शुरू  हो गयी MLA जूठा है, MLA चोर है...!
अचानक किसी असामाजिक तत्व ने पास में ही लगे लाईट के खम्भे की होर्डिंग हटाने की कोशिश की जिससे शोर्ट सर्किट हो गया (इस जमावड़े के बीच में ही लाईट वही अंक मिचोली खेल रही थी) और लोग बचने के लिए इधर उधर हो गए, इसी बीच किसी दुसरे असामाजिक तत्व ने पत्थर भी फेकनें शुरू कर दिए!
मौका देख कर MLA साहेब वहां से निकल गए, यूँही तड़पते हुवे उन लोगों को छोड़कर जिन्होंने इनको जिताने के लिए अपने दिन और रातें क़ुर्बान दीं!
इसी बीच पुलिस ने भी लोगों को खदेड़ना प्रारंभ कर दिया ! फिर क्या था ना ही कुछ हुवा ना ही कुछ मिला और लोग धीरे धीरे अपने अँधेरे में डूबे हुवे घरों की तरफ बढ़ने लगे ! "लोग जाते गए और कारवा ख़तम होता रहा"!
लाईट आ गई मगर रात्रि 1 बजे ! इसके पश्चात् भी आंख मिचोली रात भर चलती रही !




बेचारे मुंब्रा के निवासी वाक़ई शांति पसंद हैं!
-- ज़ियाउल इस्लाम

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